रायगढ़। प्रदेश सरकार के विभिन्न मंचों से जनता को सुशासन के किए जाने वादों का असर अब दिखने लगा है। प्रदेश स्तर ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन भी सरकार के दावों को मूर्त रूप देने पूरी कर्मठता से लगा हुआ है। लगभग सारा दिन, पूरे हफ्ते मीटिंगों का दौर चलते रहता है। 2047 तक भारत को कैसे भी करके विकसित करना है, हर शहर को शंघाई की तर्ज पर बनाना है, इसीलिए जिसको जैसा उचित लगे, जैसी मर्जी हो, जो भी मर्जी हो काम कर सकता है।
किसी भी कार्य हेतु तय सरकारी मानदंड/दिशानिर्देश उनकी समय पर पूर्णता या यों कहें अनैतिक लाभार्जन में बाधक होते हैं, इसीलिए समय समय पर उन्हें व्यक्ति विशेष की सुविधानुसार तोड़ा मरोड़ा या शिथिल किया जाता रहा है इसका ताजा उदाहरण हमें जिले के खरसिया ब्लॉक मुख्यालय में देखने को मिल रहा है। जहाँ घनी आबादी वाली जगह, वह भी रेल्वे स्टेशन के समीप खुलेआम दो व्यापारियों द्वारा अपने दूसरे व्यापार की आड़ लेकर पटाखों का व्यापार किया जा रहा है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन व्यापारियों द्वारा खरसिया नगर के आसपास जैसे महका, मकरी, सपिया, रायगढ़ रोड में मौहपाली, हमालपारा क्षेत्र के गोदामों, राइसमिल तेंदूपत्ता गोदामों में अवैध रूप से भंडारण करके रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि इन व्यापारियों के द्वारा पटाखों की बिक्री हेतु रात्रि या सुबह के समय मालवाहक वाहनों के माध्यम से अपने दुकानों के ऊपर बने भवन में भंडारित कर लिया जाता है, जिसे दिन भर विक्रय किया जाता है। आप इस बात का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि ये व्यापारी इतने बड़े स्तर पर इस काम को कर रहे हैं कि अंबिकापुर, जशपुर और कोरबा ही नहीं बल्कि रायगढ़ से भी कई चिल्हर विक्रेता इनके पास से पटाखों की खरीदी कर चुके है या कर रहे हैं।
पटाखों या विस्फोटक के भंडारण और विक्रय (थोक व चिल्हर) के लायसेंस/अनुज्ञा हेतु शासन के अलग अलग मापदंड हैं। रायगढ़ जिला कार्यालय से जिले के पटाखा व्यापारियों हेतु लायसेंस जारी किए जाते हैं। जिला कार्यालय के सूत्रों के अनुसार खरसिया क्षेत्र के किसी भी व्यापारी को इनके कार्यालय से भंडारण हेतु अनुज्ञा जारी नहीं की गई है, इससे साफ जाहिर होता है कि इन व्यापारियों द्वारा अवैध रूप से पटाखों का भंडारण व विक्रय किया जा रहा है, वह भी घनी रिहायश वाले क्षेत्र में, कल को कोई घटना, दुर्घटना होने पर भारी जानमाल की क्षति से इनकार नहीं किया जा सकता।
सबसे आश्चर्य की बात यह है कि इनकी दुकानों से महज कुछ ही दूरी पर पुलिस चौकी स्थित है, साथ ही खरसिया में प्रशासनिक व पुलिस के अनुविभागीय स्तर के अधिकारी पदस्थ हैं, फिर भी क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियों का भान न होना, या इनके संज्ञान में न आना समझ से परे है। अब यह तो जांच का विषय है, सही गलत पर से पर्दा जांच उपरांत ही उठेगा।
क्रमशः
🔹इन अवैध पटाखा व्यापारियों की कौन कर रहा है दलाली..
🔹इस व्यापार हेतु भारी भरकम धनराशि लेकिन कितनी खर्च किए जाने की है नगर में चर्चा..
🔹क्या सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन प्रदेश में है लागू, कौन कौन से पटाखे हैं बैन..
यह सब अगले पार्ट में….
जिले में बह रही सुशासन की बयार : पटाखों के अवैध भंडारण या परिवहन पर अब तक शून्य कार्रवाई


