
रायगढ़। शांत फिजा, सुरम्य वादियों वाले इस धान के कटोरे कहे जाने वाले राज्य के जिले को धन लोलुपों की नजर क्या लग गई, धुआंधार होते औद्योगिकरण के कारण लगातार मासूम मौत की चादर ओढ़ते जा रहे हैं। चाहे उद्योगों में हो या सड़कों में रोजाना मासूम जानें मौत के आगोश में समा रही हैं। बस नहीं हट रहा है तो इन धन लोलुपों के आंखों से पर्दा। जिस रफ्तार से बाजार में महंगाई बढ़ रही है उसी रफ्तार से सस्ती होती जा रही है इंसान की जान।
शासन हो या प्रशासन खानापूर्ति स्वरूप अपनी प्रक्रिया पूर्ण करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। पूंजीपतियों की तिजोरी में धन बढ़ रहा है, और वहीं पीड़ितों के घर, जेहन में छोड़ जा रहे हैं मातम। क्या किसी की लापरवाही या धनलोलुपता का शिकार होकर अपनी बेशकीमती जान गंवाते इन मासूमों के साथ इंसाफ महज मुआवजा है, क्या किसी की जान इतनी सस्ती है कि आप उसकी कीमत लगा लें। उन परिवारों की खुशियां, उनके अपने जिनको वे सदा के लिए खोते जा रहे हैं उनका मूल्य क्या महज चन्द सिक्के हैं।
अग्रोहा स्टील प्लांट के हिट एक्सचेंजर में काम कर रहे एक मजदूर युवक पर गर्म राख इस कदर गिरा कि बुरी तरह झुलसने से असमय काल के गाल में समा गया। दिल को दहला देने वाला यह हादसा पूंजीपथरा थाना क्षेत्र का है। सूत्रों के अनुसार लैलूंगा के ग्राम चँवरपुर निवासी उमेश चौहान पिता उदल चौहान (19 वर्ष) पूंजीपथरा थानांतर्गत ग्राम पंचायत लाखा के गेरवानी से लगे ग्राम पाली स्थित अग्रोहा स्टील एंड पावर प्रायवेट लिमिटेड में बतौर मजदूर काम करते हुए प्लांट के ही लेबर कॉलोनी में रहा करता था। कल 24 सितंबर के अपरान्ह लगभग साढ़े 12 बजे अग्रोहा स्टील प्लांट के हिट एक्सचेंजर सेक्शन में उमेश गर्म राख खाली कर रहा था।
इस दौरान गर्म राखड़ अचानक उमेश के ऊपर जा गिरा। इससे पहले वह अपना बचाव कर पाता, वह गर्म राख की चपेट में आने से बुरी तरह झुलसकर अधमरा हो गया। वहीं हिट एक्सचेंजर में उमेश को गंभीर रूप से झुलसे देख आसपास काम कर रहे श्रमिकों ने कंपनी प्रबन्धन को हादसे की सूचना दी, साथ ही घटना की सूचना पूंजीपथरा थाने को दी गई।
घटना की सूचना मिलते ही पूंजीपथरा थाना प्रभारी राकेश मिश्रा ने सहायक उपनिरीक्षक जयराम सिदार और आरक्षक सतीश सिंह को तत्काल अग्रोहा स्टील प्लांट भेजा। सूत्रों के अनुसार उक्त श्रमिक मौके पर ही काल कलवित हो चुका था, लिहाजा मृतक के परिजनों को उपस्थिति में पुलिस द्वारा पंचनामा कार्यवाही करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। बहरहाल, गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव को शोकाकुल चौहान परिवार के सुपुर्द कर पुलिस मर्ग कायम कर हादसे की जांच पड़ताल में जुटी है।
सुरक्षा उपायों की अनदेखी मुख्य वजह
गरीब चौहान परिवार का चिराग यानी उमेश कुछ महीने पहले यह सोचकर अग्रोहा स्टील एंड पावर प्रायवेट लिमिटेड में काम करता था कि जवानी में खून-पसीना बहाने के बदले हुई कमाई से वह अपने परिजनों का हाथ बंटाते हुए उनकी आर्थिक सहायता करेगा, लेकिन इसके बदले में उसे अपनी जान गंवानी पड़ गई। जानकारों की माने तो हिट एक्सचेंजर में सुरक्षा व्यवस्था माकूल नहीं होने की वजह से उमेश हादसे का शिकार हुआ।
हालिया हमने यह समाचार प्रकाशित किया था कि मार्च 2025 से लेकर जुलाई माह तक विभिन्न उद्योगों में हुए हादसों में लगभग 12 कर्मचारियों ने अपनी जाने गवाएं हैं। बजाय ये फेहरिस्त कम होने के या इस पर लगाम लगने के यह लगातार रफ्तार पकड़ती ही जा रही है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष वह अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में व्यस्त हैं, और इनसे जुड़े विभाग अपने अधिकारों के तहत खानापूर्ति में। असमय काल के गाल में समाते इन मासूमों को खोने का इनके परिजनों को मिलता है तो क्या सिर्फ मुआवजा और रही बात इंसाफ की तो वो है अर्थदंड।


