बिजली विभाग के संभागीय कार्यालय की लापरवाही में लाखोंं के ट्रांसफार्मर स्वाहा
दर्जनों पत्राचार के बावजूद कोतरा रोड भंडार गृह में सुरक्षा इंतजामात के कार्य नहीं हुए स्वीकृत

रायगढ़ । कोतरा रोड स्थित छ.ग.राज्य विद्युत वितरण विभाग के भंडार गृह में लगी भीषण आग शांत तो हो गई है पर इसके कारण और इसके जिम्मेदारों पर कार्रवाई अभी तक बाकी है। मंगलवार को राज्य स्तरीय टीम जाँच करने आई जो महज खानापूरी कर लौट गई। उन्होंने कह तो दिया कि सात दिनों के अंदर जाँच रिपोर्ट आ जायेगी। कहानी को जाँच और उसकी दिश मोड़ कर खत्म कर दी जायेगी या फिर वास्तव में कुछ बड़े निर्णय लिये जायेंगे।
आग लापरवाही से लगी या फिर किसी बाहरी कारण से पर इतना तो तय है कि भंडार गृह के पास आगजनी से निपटने के व्यापक इंतजाम नहीं थे। जिस आग को शुरूआत में रोका जा सकता था उसे क्यों नहीं रोका गया। दो साल पहले जब इसी जगह एक बड़ी आगजनी हुई थी तब उससे विभाग ने क्या सबक लिया। ये सारे प्रश्न लोगों के मन में दौड़ रहे है कि इसी बीच एक वीडियो फॉरेंसिक एक्सपर्ट का वायरल हो रहा है कि १५ फीट दीवाल के बाहर कोई बीड़ी-सिगरेट पीकर फेंक दिया होगा जिसकी ठूंठ से आग बाहर की झाडिय़ों से होती हुई अंदर आई और आग फैल गई पर मौके पर कहानी कुछ और निकली। जिन झाड़-झंझाड़ से आग का भंडार गृह में आगमन का अंदेशा जताया गया था वहां भी झाड़-झंझाड़ हरे रंग के ही मिले।
बहरहाल इस घटना पर कार्यपालन अभियंता द्वारा कोतवाली में अज्ञात लोगों द्वारा आगजनी की घटना को अंजाम देने की शिकायत आज दर्ज कराई गई है। जाँच टीम बीच-बीच में फिर से आयेगी लेकिन क्या यहां के इंतेजाम में व्यापक सुधार हो पायेगा जिससे की भविष्य में ऐसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो।

नुकसान का आंकलन जारी है: गुंजन शर्मा
कोतरा रोड बिजली विभाग के भंडार गृह के कार्यपालन अभियंता गुंजन शर्मा ने बताया कि आगजनी में ३०० से अधिक ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनकी संख्या बढ़ भी सकती है। क्षति पूर्ण रूप से और आंशिक रूप से कितने में हुई है इसका आंकलन अभी चल रहा है। राज्य से जाँच टीम कल आई थी और आने वाले समय में भी आयेगी। मैंने आज आगजनी के लिये अज्ञात लोगों पर कार्रवाई हेतु थाना कोतवाली में आवेदन दिया है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट की प्रथम दृष्टया में आग भंडार गृह के बाहर से हवा के साथ आई थी जिसके कारण यह आगजनी की घटना घटित हुई।
इस आगजनी का जिम्मेदार कौन?
दो साल पहले मार्च महीने में इसी तरह की आग भंडार गृह में लगी थी तब २० लाख के ट्रांसफार्मर जलकर खाक हो गये थे। १० लाख में कुछ ट्रांसफार्मर को सुधारा गया। उस समय भंडार गृह में आगजनी की घटना को रोकने के लिये कई प्रस्ताव और योजनाएं बनी। अधीक्षण अभियंता बदले गये। नये अभियंता को लाया गया। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां से दर्जनों पत्राचार बिलासपुर स्थित बिजली वितरण कंपनी के संभागीय कार्यालय, सिविल विभाग और जिम्मेदार अफसरों को किये गये। जिसमें भंडार गृह में वाटर स्प्रिंकलर, फायर स्टेशन, बोर खनन, फायर एक्सटिंग्विशर की संख्या बढ़ाने, सुरक्षा हेतु कई प्रकार के निर्माण कार्य जैसे वाटर टैंक, सीसी प्लेट फॉर्म, सडक़ आदि की मांग की गई पर ये कागज वहीं की फाईलों में दबकर रह गये। दो साल बाद मार्च महीने मेें बीते आगजनी की तुलना में ४ गुना भयावह आग लग गई। इस पर काबू पाने के लिये दुर्ग जिले तक से दमकल वाहन मंगाये गये। जबकि आग शुरूआत में तारों के बंंडल पर लगी थी बाहर के किसी व्यक्ति ने यहां के सजग प्रहरियों को आग लगने की सूचना दी तो ये बेचारे दो कर्मचारी कुछ फायर एक्सटिंग्विशर के भरोसे कहां आग पर काबू कर पाते। जब तक अधिकारियों-कर्मचारियों की फौज तब तक आग की मौज हो चुकी थी।

भगवान भरोसे बिजली विभाग का भंडार गृह
पूरे जिले में बिजली सप्लाई के लिये तार, ट्रांसफार्मर और जरूरी उपकरण कोतरा रोड स्थित बिजली वितरण विभाग के भंडार गृह में संग्रहित है। ट्रांसफार्मर में उपयोग में आने वाला तेल ज्वलनशील होता है और इस भंडार गृह में ही खुले में ही हजारों की संख्या में नये-पुराने ट्रांसफार्मर, तेल के ड्रम रखे गये हैं। इनकी सुरक्षा में केवल चार कर्मचारी रात में और दो कर्मचारी दिन में रहते हैं। मजेदार बात यह है कि इन्हीं दो कर्मचारियों के भरोसे मेन गेट की एंट्री, एक्जिट का काम भी लिया जाता है। रात में जो कर्मचारी होते है वे भी गेट और गोदाम दोनों संभालते हैं। ये सारे कर्मचारी विभाग के नियमित कर्मचारी न होकर प्लेसमेंट के मार्फत रखे गये हैं। पूरे भंडार गृह में दो फायर एक्सटिंग्विशर और एक बड़ा सिलिन्डर वाला आग बुझाने का यंत्र रखा गया था। रेत भी पर्याप्त मात्रा में नहीं थी। कुल मिलाकर अगर कर्मचारी पर्याप्त होते और आग बुझाने के सामान पर्याप्त होते तो समय रहते इस छोटी सी आग को नियंत्रित किया जा सकता था।